ज़िंदगी के पल कुछ थाम ना सका
कुछ रिश्तों को अपना बना ना सका
पुराने दिन बहुत याद आते है
कुछ किस्से बहुत रुलाते है
जिगरी यार आईना दिखते रहे
मैं अपने आप को उसमे संवारता रहा
ऐसे ही कुछ लम्हे रुला जाते है
ना रोऊं बहुत कोशिश करता हूं
पर हर बार आंसू धोखा दे जाते है
पुराने दिनों को याद करना छोड़ दिया
अजनबियों को अपना बनाना छोड़ दिया
अब ना है कुछ पाना
बस जो है उसे ना है खोना
वो लम्हे वो पल
वो यारियां वो महफ़िल
वो मुलाकातें
दिल जलता है उस ज़िंदगी को
कैसे रोक पाता हूं उन लम्हों को
दिल रोता है अकेलेपन में
सांसे रुक जाती है
मै वहीं ठहर जाता हूं
और रो पड़ती है मेरी रूह
कैसे करूं अपने विचारो की बयां
निकाल जाएगा वक़्त इसे रोक लो अपने दिल में बसा लो कल मिले ना मिले बस यादों को ज़हन में बसा लो।
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