एक दोस्ती थी जो मोहबत्त में तब्दील होनी रह गई,
कुछ कहानियां, कुछ किस्से हमारे दरमियाँ
"This message was deleted" में छुपी रह गई।
अंजाम तो थी तुम मेरा,
तुम मेरी इबादत भी थी।
दोस्त तो थी ही,
दोस्ती से बढ़कर कुछ ज्यादा भी थी।
अरे, पतझड़ के मौसम लिखी थी हज़ारों चिठ्ठियां,
शायद इस मौसम में कहीं झड़ गई।
लफ्ज़ तो तुम्हारे मुकर्ते रह गए,
ये ख़ामोशी भी हमे समझ में आनी रह गई।
कुछ कहानियां, कुछ किस्से हमारे दरमियाँ,
"This message was deleted" में छुपी रह गई।
वो बात ही कुछ ऐसी थी थी दिल से शुरू होती पर जुबां पर आ कर रुक जाती,
एक दोस्ती हर बार मोहबत्त की दहलीज से लौट के आ जाती।
सिर्फ दोस्ती अगर होती तो ये बेचैनी बेकाबू हो जाती,
ये मोहबत्त ही है जो ख़ामोशी से मर जायेगी।
बिन इजहार किये कैसे होता आशिक़ का गुज़ारा,
तुम्हारे सिवा जिस से भी मिले उससे किया ज़िक्र तुम्हारा।
कुछ कहानियां, कुछ किस्से हमारे दरमियाँ,
"This message was deleted" में छुपी रह गई।
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