Tuesday, 26 March 2019

Waqt


ज़िंदगी के पल कुछ थाम ना सका
कुछ रिश्तों को अपना बना ना सका
पुराने दिन बहुत याद आते है
कुछ किस्से बहुत रुलाते है

जिगरी यार आईना दिखते रहे 
मैं अपने आप को उसमे संवारता रहा
ऐसे ही कुछ लम्हे रुला जाते है
ना रोऊं बहुत कोशिश करता हूं
पर हर बार  आंसू धोखा दे जाते है

पुराने दिनों को याद करना छोड़ दिया
अजनबियों को अपना बनाना छोड़ दिया
अब ना है कुछ पाना 
बस जो है उसे ना है खोना 

वो लम्हे वो पल
वो यारियां वो महफ़िल
वो मुलाकातें 
दिल जलता है उस ज़िंदगी को
कैसे रोक पाता हूं उन लम्हों को

दिल रोता है अकेलेपन में
सांसे रुक जाती है 
मै वहीं ठहर जाता हूं
और रो पड़ती है मेरी रूह

कैसे करूं अपने विचारो की बयां 
निकाल जाएगा वक़्त इसे रोक लो अपने दिल में बसा लो कल मिले ना मिले बस यादों को ज़हन में बसा लो।

दोस्ती


एक दोस्ती थी जो मोहबत्त में तब्दील होनी रह गई,
कुछ कहानियां, कुछ किस्से हमारे दरमियाँ
"This message was deleted" में छुपी रह गई।

अंजाम तो थी तुम मेरा,
तुम मेरी इबादत भी थी।
दोस्त तो थी ही,
दोस्ती से बढ़कर कुछ ज्यादा भी थी।

अरे, पतझड़ के मौसम लिखी थी हज़ारों चिठ्ठियां,
शायद इस मौसम में कहीं झड़ गई।
लफ्ज़ तो तुम्हारे मुकर्ते रह गए,
ये ख़ामोशी भी हमे समझ में आनी रह गई।

कुछ कहानियां, कुछ किस्से हमारे दरमियाँ,
"This message was deleted" में छुपी रह गई।

वो बात ही कुछ ऐसी थी थी दिल से शुरू होती पर जुबां पर आ कर रुक जाती,
एक दोस्ती हर बार मोहबत्त की दहलीज से लौट के आ जाती।
सिर्फ दोस्ती अगर होती तो ये बेचैनी बेकाबू हो जाती,
ये मोहबत्त ही है जो ख़ामोशी से मर जायेगी।

बिन इजहार किये कैसे होता आशिक़ का गुज़ारा,
तुम्हारे सिवा जिस से भी मिले उससे किया ज़िक्र तुम्हारा।
कुछ कहानियां, कुछ किस्से हमारे दरमियाँ,
"This message was deleted" में छुपी रह गई।

Sunday, 17 March 2019

शहर की याद


बैठे बैठे कई दफा सोचता हूँ
के कैसी होगी वो गलियां, कैसा होगा वो शहर?
जहाँ बिताया था मैंने बचपन, और बड़े होने को थे त्यार
जहाँ खुशियां थी, लाड था हर पहर
जहाँ था भाई का स्नेह, माँ बाप का प्यार
वही तो था मेरी खुशियों का संसार
कैसी होगी वो गलियां, कैसा होगा वो शहर?

आशिक़ तेरा


ख़ामोश पड़ी ज़ुल्फों को ये हवा छेड़ जाती है
दिल की धड़कन ज़रा सी रुक जाती है
तेरी एक मुस्कान देखने को रूह भी तड़प जाती है

एक झलक पाने को ये वक़्त रुक जाता है मेरा
दुनिया भूल कर बस हो कर रह जाता हूं तेरा
मोहल्ले से ऐसे गुज़रता हूँ तेरे
आशिक़, आवारा कुछ ऐसे नाम रखे है मेरे

दिल कहता है तेरी ज़ुल्फों से खेलूं
तुझको बस अपनी दिल की आँखों से देखूं
जब तू नज़रों के सामने से ओझल हो जाती है
दिल की धड़कन ज़रा थम जाती है

जादू भरी आँखों वाली


सुनो, जादू भरी आँखों वाली
तुम ऐसे ना देखा करो।

जब से तूमको देखा है,
दिल में हलचल मचाती हो।

कोई शायरी मैं ऐसी सुनाऊंगा
चाँद में तुमको पाउँगा।

कविता मैं ऐसी लिखूंगा
हर खुशबू में तुमको ढूंढूंगा।

सुनो, जादू भरी आँखों वाली
तुम ऐसे ना देखा करो।

हमसफ़र


मान लेना इसे आखिरी तमन्ना मेरी
मरु तो रख देना एक तस्वीर तेरी
फिर रोज़ खुदा से मुलाकात होगी
शिकायतें होगी शिकवे होंगे फिर तो हर बात होगी

फिर पूछेगा खुद क्या मर्ज है तेरी
मैं कहूंगा बस एक ही अर्ज है मेरी
अगला जन्म का सफर तय न होगा
तब ही होगा जब हमसफ़र साथ होगा

खुदा कहेगा तो बता कैसा हमसफ़र चाहिए तुझे
तब तेरी तस्वीर थमा खुदा के हाथ ऐसी चाहिए मुझे

ना इससे लंबी , ना इससे छोटी नाक
ना थोड़ी पतली, ना ज्यादा मोटी
ना इससे हलकी, ना इससे भारी
ना थोड़ी गोरी, ना इससे कारी

आँखें बिलकुल ऐसी जैसी ये दिखती है
झुल्फ़े भी बिलकुल ऐसे बांधे जैसे ये बाधंती है
कहूंगा ऐ खुदा बस इतना सा कर देना
के इस दिल में थोड़ा और प्यार भर देना

Sunday, 10 March 2019

कॉलेज के वो दिन


कॉलेज के वो दिन याद आ गए,
हम मोटरसाइकिल से आया करता थे।
मेरे आलू के परांठे वाले टिफिन को,
दोनों मिलकर खाया करते थे।

मैं बहुत मोटा था और,
तू बहुत पतली थी।
इसी बात पर तेरी मेरी,
बहुत लड़ाई होती थी।

वो पहला दिन याद कर,
जिस दिन तू अकेली आई थी।
इतने से पलों में,
मेरी आंखों में समाई थी।

एक साल बीत गया,
लेकिन ना तू बदली ना मैं बदला।
बदल गए थे वो सारे दोस्त,
जो कहते थे हम ना बदलेंगे कभी ए मेरे दोस्त।

सब तुझे टॉपर टॉपर कहते थे,
मुझे बहुत जलन होती थी।
तेरे बराबर कैसे आऊ सोच सोच,
पूरी रात जागते कटती थी।

पर तुमसे लड़ाई करना,
बहुत अच्छा लगता था।
मैं इतना मोटा था कि,
तू बच्ची सी लगती थी।

हद्द तो तब हो गई,
जब पिकनिक पर गए थे।
मेरे वाले आलू के परांठे,
सब खत्म हो गए थे।

जानता हूं ये पढ़कर,
तू बहुत हंस रही होगी।
और तेरे चेहरे पर,
वहीं हंसी जच रही होगी।

पर यार पूनम...
याद नहीं कौन सी बात,
हमे अच्छे दोस्त बना गई।
आज कुछ तेरी तस्वीरें देखते देखते
मुझे कॉलेज की याद आ गई।

Waqt

ज़िंदगी के पल कुछ थाम ना सका कुछ रिश्तों को अपना बना ना सका पुराने दिन बहुत याद आते है कुछ किस्से बहुत रुलाते है जिगरी यार आईना...