कॉलेज के वो दिन याद आ गए,
हम मोटरसाइकिल से आया करता थे।
मेरे आलू के परांठे वाले टिफिन को,
दोनों मिलकर खाया करते थे।
मैं बहुत मोटा था और,
तू बहुत पतली थी।
इसी बात पर तेरी मेरी,
बहुत लड़ाई होती थी।
वो पहला दिन याद कर,
जिस दिन तू अकेली आई थी।
इतने से पलों में,
मेरी आंखों में समाई थी।
एक साल बीत गया,
लेकिन ना तू बदली ना मैं बदला।
बदल गए थे वो सारे दोस्त,
जो कहते थे हम ना बदलेंगे कभी ए मेरे दोस्त।
सब तुझे टॉपर टॉपर कहते थे,
मुझे बहुत जलन होती थी।
तेरे बराबर कैसे आऊ सोच सोच,
पूरी रात जागते कटती थी।
पर तुमसे लड़ाई करना,
बहुत अच्छा लगता था।
मैं इतना मोटा था कि,
तू बच्ची सी लगती थी।
हद्द तो तब हो गई,
जब पिकनिक पर गए थे।
मेरे वाले आलू के परांठे,
सब खत्म हो गए थे।
जानता हूं ये पढ़कर,
तू बहुत हंस रही होगी।
और तेरे चेहरे पर,
वहीं हंसी जच रही होगी।
पर यार पूनम...
याद नहीं कौन सी बात,
हमे अच्छे दोस्त बना गई।
आज कुछ तेरी तस्वीरें देखते देखते
मुझे कॉलेज की याद आ गई।
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