Wednesday, 7 February 2018

तेरा हूं

अब तक बस जी रहा था मै 
जिंदगी की होड़ का हिस्सा था मै
कभी इस गली, तो कभी उस गली
कभी इस शहर, तो कभी उस शहर
जवानी के बहाव में मदहोश था मै
बस एक तुम्हारी दस्तक से कुछ ऐसा सुकून मिला 
खुशनसीब हूं अब के, तेरा हूं मै



कितने अजीब होते है ये रेलवे स्टेशन
किसी से मिलने की खुशी 
किसी अपने से विदा होने की तकलीफ 
किसी के इंतजार में टक टकी लगाए आंखे
एक ही जगह पर कितना कुछ दिख जाता है


Monday, 5 February 2018

मां


             ममता, ना कभी इम्तेहान लेती है और ना कभी इम्तेहान देती है

         मां तो वो होती है जो बारिश मै भीगे चेहरे पर भी आंसू पहचान लेती है

Sunday, 4 February 2018

ये बरसात का मौसम, ये टपकती हुई छत 
ये नम आँखे और तेरे ख़त 

आज तो तू भीगने से डर रही है  मेरी जां 
कल ये  बारिशों  का मौसम  ही नहीं रह जायेगा 

भीगने दे इन पलकों को और भुझने दे दिल की तड़प 
कौन जाने फिर ये सावन लौट के कब आएगा 

Waqt

ज़िंदगी के पल कुछ थाम ना सका कुछ रिश्तों को अपना बना ना सका पुराने दिन बहुत याद आते है कुछ किस्से बहुत रुलाते है जिगरी यार आईना...