Sunday, 17 March 2019

हमसफ़र


मान लेना इसे आखिरी तमन्ना मेरी
मरु तो रख देना एक तस्वीर तेरी
फिर रोज़ खुदा से मुलाकात होगी
शिकायतें होगी शिकवे होंगे फिर तो हर बात होगी

फिर पूछेगा खुद क्या मर्ज है तेरी
मैं कहूंगा बस एक ही अर्ज है मेरी
अगला जन्म का सफर तय न होगा
तब ही होगा जब हमसफ़र साथ होगा

खुदा कहेगा तो बता कैसा हमसफ़र चाहिए तुझे
तब तेरी तस्वीर थमा खुदा के हाथ ऐसी चाहिए मुझे

ना इससे लंबी , ना इससे छोटी नाक
ना थोड़ी पतली, ना ज्यादा मोटी
ना इससे हलकी, ना इससे भारी
ना थोड़ी गोरी, ना इससे कारी

आँखें बिलकुल ऐसी जैसी ये दिखती है
झुल्फ़े भी बिलकुल ऐसे बांधे जैसे ये बाधंती है
कहूंगा ऐ खुदा बस इतना सा कर देना
के इस दिल में थोड़ा और प्यार भर देना

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