Sunday, 17 March 2019

शहर की याद


बैठे बैठे कई दफा सोचता हूँ
के कैसी होगी वो गलियां, कैसा होगा वो शहर?
जहाँ बिताया था मैंने बचपन, और बड़े होने को थे त्यार
जहाँ खुशियां थी, लाड था हर पहर
जहाँ था भाई का स्नेह, माँ बाप का प्यार
वही तो था मेरी खुशियों का संसार
कैसी होगी वो गलियां, कैसा होगा वो शहर?

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Waqt

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