Thursday, 3 May 2018

सुबह जल्दी उठने की फ़िक्र उसे रात को ठीक वक़्त पर बिस्तर पर लेटा तो देती है लेकिन
नींद अपनी मनमानी से बाज़ नहीं आती
दिन तो दुनियावी रश्मे बिताते बीत जाता है
लेकिन रातें उसकी दुश्मन है
अंधेरा होते ही पुराना वक़्त "भांये - भांये" उसके कानों में बजने लगता
वो करवटें बदलते शरीर को ऐसी स्थिति में ले जाने की कोशिश में था की उस नींद  जाए।

Thursday, 5 April 2018


खतों का कभी जवाब भी दे दिया करो,
वरना दिल में रुसवाईयां हो जाती है

मेरी खामोशियों को पढ़ लिया करो,
अक्सर लफ्जो से लड़ाईयां हो जाती है।


हां तुम मेरे लिए स्टेटस नहीं लिखती 
तो क्या हुआ तुम मेरी कोई फोटो नहीं लगाती 
लेकिन सिंदूर तो तुम मेरे नाम का ही लगाओगी

हां मैं तुम्हारे लिए पहले जैसे कपड़े नहीं छंटवाता 
तो क्या हुआ मैं तुम्हारे लिए कोई गुलाब का फूल नहीं लाता
लेकिन घर में बड़ी सी तस्वीर तुम्हारी ही लगाऊंगा

Friday, 30 March 2018


 सभी को गम है समन्दर के सुख जाने का,
चलो  सिलसिला ख़त्म  हुआ कश्तियां डुबाने का।


Wednesday, 7 February 2018

तेरा हूं

अब तक बस जी रहा था मै 
जिंदगी की होड़ का हिस्सा था मै
कभी इस गली, तो कभी उस गली
कभी इस शहर, तो कभी उस शहर
जवानी के बहाव में मदहोश था मै
बस एक तुम्हारी दस्तक से कुछ ऐसा सुकून मिला 
खुशनसीब हूं अब के, तेरा हूं मै



कितने अजीब होते है ये रेलवे स्टेशन
किसी से मिलने की खुशी 
किसी अपने से विदा होने की तकलीफ 
किसी के इंतजार में टक टकी लगाए आंखे
एक ही जगह पर कितना कुछ दिख जाता है


Monday, 5 February 2018

मां


             ममता, ना कभी इम्तेहान लेती है और ना कभी इम्तेहान देती है

         मां तो वो होती है जो बारिश मै भीगे चेहरे पर भी आंसू पहचान लेती है

Sunday, 4 February 2018

ये बरसात का मौसम, ये टपकती हुई छत 
ये नम आँखे और तेरे ख़त 

आज तो तू भीगने से डर रही है  मेरी जां 
कल ये  बारिशों  का मौसम  ही नहीं रह जायेगा 

भीगने दे इन पलकों को और भुझने दे दिल की तड़प 
कौन जाने फिर ये सावन लौट के कब आएगा 

Waqt

ज़िंदगी के पल कुछ थाम ना सका कुछ रिश्तों को अपना बना ना सका पुराने दिन बहुत याद आते है कुछ किस्से बहुत रुलाते है जिगरी यार आईना...