सुबह जल्दी उठने की फ़िक्र उसे रात को ठीक वक़्त पर बिस्तर पर लेटा तो देती है लेकिन
नींद अपनी मनमानी से बाज़ नहीं आती
दिन तो दुनियावी रश्मे बिताते बीत जाता है
लेकिन रातें उसकी दुश्मन है
अंधेरा होते ही पुराना वक़्त "भांये - भांये" उसके कानों में बजने लगता
वो करवटें बदलते शरीर को ऐसी स्थिति में ले जाने की कोशिश में था की उस नींद जाए।
Thursday, 3 May 2018
Thursday, 5 April 2018
Wednesday, 7 February 2018
तेरा हूं
अब तक बस जी रहा था मै
जिंदगी की होड़ का हिस्सा था मै
कभी इस गली, तो कभी उस गली
कभी इस शहर, तो कभी उस शहर
जवानी के बहाव में मदहोश था मै
बस एक तुम्हारी दस्तक से कुछ ऐसा सुकून मिला
खुशनसीब हूं अब के, तेरा हूं मैMonday, 5 February 2018
मां
ममता, ना कभी इम्तेहान लेती है और ना कभी इम्तेहान देती है
मां तो वो होती है जो बारिश मै भीगे चेहरे पर भी आंसू पहचान लेती है
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Waqt
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